अच्छा नहीं लगता

· · 👁 70 reads
नींद से कहो कि आकर सुलह कर ले हमसे, रात भर यूँ यादों का जागना अच्छा नहीं लगता। किताब-ए-दिल के पन्ने जो पलटता हूँ अकेले में, यूँ अश्कों से लफ़्ज़ों का भीगना अच्छा नहीं लगता। तन्हाई के साये जब लिपट जाते हैं रूह से, बगैर तेरे इस रात का कटना अच्छा नहीं लगता। बहुत कोशिश की हमने भुलाने की वो गुज़रा कल, मगर यादों की आग में यूँ जल अच्छा नहीं लगता।

Comments (1)

Join the conversation to share your thoughts.

Log in to comment
Avatar
Himachali Pune 13 Jul 2026
kya baat hai..