verse and books by gourav baloria

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Mera Kuch Samaan

"Mera kuch saamaan tumhare paas pada hai, O saawan ke kuch bheege bheege din rakhe hain..."

Gulzar

शाम से आँख में नमी सी है

"शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है दफ़्न कर दो हमें के साँस मिले नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर इस की आ…"

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Rashmirathi

"Kshama shobhti us bhujang ko jiske paas garal ho, Usko kya jo dant-heen, vish-rahit, vinit, saral ho."

Ramdhari Singh 'Dinkar'

साँझ के झुटपुटे में

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"तेरा वादा ना पूरा हुआ, शाम से फिर सहर हो गई मुझको खिड़की पे बैठे हुए, आज भी रात भर हो गई। दो दिलो को जुदा कर गई एक परदेस की नौकरी वो भी पागल उधर…"

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Kumar Vishwas is one of the most recognizable modern Hindi poets, known for blending romanticism with sharp social and political commentary. His rise came through Kavi Sammelans, where his expressive delivery turned poetry into a performance art.

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