अदा कौन सी है

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जो आज कर दिया तूने नज़रों से घायल, मुझको बताओ ज़रा, वो अदा कौन सी है। कल चुपके से कानों में कुछ राज़ कहे थे, मगर आज ख़ामोशी में छुपी दुआ कौन सी है। तेरे चेहरे पे ये जो नूर सा छाया है सनम, तेरे क़दमों से जो महकी, वो फ़िज़ा कौन सी है। अब तेरे बिना सूना सा लगता है मुझे घर, मुझे इतना तो बताओ, मेरी खता कौन सी है। मेरी हर ग़ज़ल में बस तेरा ही ज़िक्र रहा, धड़कनों से फिर क्यों पूछूँ कि वफ़ा कौन सी है।

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