Mirza Ghalib
Late Mughal Era
One of the most popular and influential poets of the Urdu language. He wrote during the twilight of the Mughal Empire.
जिस बज़्म में तू नाज़ से गुफ़्तार में आवे
जिस बज़्म में तू नाज़ से गुफ़्तार में आवे
जाँ कालबद-ए-सूरत-ए-दीवार में आवे
साए की तरह साथ फिर...
न पूछ सीना-ए-आशिक़ से
ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है
निगाह दिल से तिरे सुर्मा-सा निकलती है
फ़शार-ए-तंगी-ए-ख़ल्वत...
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है
हम हैं मुश्ताक़ और वो बे-ज़ार
या इ...
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
...
Hazaron Khwahishen Aisi
Hazaaron khwahishen aisi ke har khwahish pe dam nikle,
Bahut niklay mere armaan, lekin phir bhi k...
Ishq Par Zor Nahin
Ishq par zor nahin, hai ye woh aatish Ghalib,
Jo lagaye na lage aur bujhaye na bane.