तेरे साथ रहकर ये असर मुझपे हुआ है

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उसकी सलामती पे मैंने, दोनों जहान लुटा दिए, कुबूल होते थे जहाँ सजदे, वंहा मकान लुटा दिए। ताउम्र जो पाला था, अपनी नेकियों को ज़हन में, इश्क़ की एक ठोकर ने, वो सारे गुमान लुटा दिए। सफ़र-ए-इश्क़ का दस्तूर है, रूह का वज़न हल्का रखना, इसी उसूल की ख़ातिर हमने, 'मैं' के गुमान लुटा दिए। उसके लिए कभी मेरे लबों पे कोई बद्दुआ न निकले, इस एक ख़ौफ़ में मैंने, सारे गिले-गुमान लुटा दिए। उसकी आहट के इंतज़ार में, खुले रहे मेरे दिल के द्वार, उसे बसाने की ज़िद में, बाकि सारे इम्कान लुटा दिए। मालूम है दिल को, इस रास्ते पर सिर्फ़ तबाही है, फिर भी मैंने जुनूँ में, अपने जहान लुटा दिए। डूबने की तलब पहले से थी "गौरव", फिर तिनके क्या सहारा देते, हमने साहिल से पहले ही, अपने बचने के सामान लुटा दिए।

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