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चुम्बन

By Dharmveer Bharati

रख दिए तुमने नज़र में बादलों को साध कर, आज माथे पर, सरल संगीत से निर्मित अधर, आरती के दीपकों की झिलमिलाती छाँह में बाँसुरी रखी हुई ज्यों भागवत के पृष्ठ पर!

साँझ के झुटपुटे में →
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