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प्रेमी

By Sant Kabir Das

प्रेमी ढूँढ़त मैं फिरूँ, प्रेमी मिलै न कोइ प्रेमी कूँ प्रेमी मिलै तब, सब विष अमृत होइ

← रहना नहिं देस बिराना है।
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