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छुक छुक छुक छुक रेल चली है जीवन की,

By Anjum Rehbar

छुक छुक छुक छुक रेल चली है जीवन की, हँसना-रोना, जागना-सोना, खोना-पाना, सुख-दुख। छुक छुक छुक छुक रेल चली है जीवन की।2 छोटी-छोटी सी बातों से मोटी-मोटी ख़बरों तक, यह गाड़ी ले जाएगी हमको माँ की गोद से कब्रों तक, चिल्लाते रह जाएंगे रुक-रुक... छुक छुक छुक छुक रेल चली है जीवन की।2 सामान की रक्षा करो लेकिन चोरों से होशियार रहो, जाने कब चलना पड़ जाए, चलने को तैयार रहो, जाने कब सीटी बज जाए सिग्नल जाये झुक छुक छुक छुक छुक रेल चली है जीवन की।2 पाप और पुण्य की गठरी बांधे सत्यनगर को जाना है, जीवन नगरी छोड़ के हमको दूर सफर को जाना है, ये भी सोचना हमने क्या-क्या माल किया है बुक... छुक छुक छुक छुक रेल चली है जीवन की।2 रात और दिन उस रेल के डिब्बे और सांसों का इंजन है, उम्र है इस गाड़ी के पहिए और चिता हिल स्टेशन है, जैसे दो पटरी हों वैसे साथ चलेंगे सुख-दुख... छुक छुक छुक छुक रेल चली है जीवन की।2

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