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Gourav Baloria

Gourav Baloria

Contemporary
Gourav Baloria is the founder of Verseandbooks — a sanctuary for Hindi and English poetry lovers. His verses explore love, longing, solitude, and the quiet beauty of everyday emotions.

लेखन शैली

Lyrical and introspective. Gourav writes with raw honesty, blending simple Hindi with deep emotional undertones. His style feels personal, like a conversation with the reader.
चेहरे पे उसने एक नया चेहरा सजा लिया
चेहरे पे उसने एक नया चेहरा सजा लिया, सच्चे मेरे ख़ुलूस को खिलौना बना लिया। दिल में नहीं थी चाहत ...
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अब दोबारा उडने के काबिल नहीं रहा हूँ में
तुझसे जुदा हो के खुद का ही नहीं रहा हूँ में खुद में होकर भी खुद का ही नहीं रहा हूँ में इक छ...
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मोहब्बत नहीं समझते
मैंने आज यूट्यूब में एक वीडियो में यह लाइनें सुनीं, जो कुछ इस तरह थीं "जब दिल पर किसी की मोहब्...
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ज़िंदगी कहाँ इतनी आसान
अब रुक सा जाता हूँ, कुछ करने से पहले, सोचने लगता हूँ, कुछ कहने से पहले। ठोकरें खाकर अब, संभलन...
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तू ही तो है
मेरे इश्क़ की सबसे पावन नदी, तू ही तो है, मेरी रूह की आख़िरी तिश्नगी, तू ही तो है। क्या झेलम...
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ज़िंदगी की हर साँस तुझपे वार दूँ,
ज़िंदगी की हर इक साँस तुझपे वार दूँ, मरते दम तक तुझे बे-पनाह प्यार दूँ। तू मुझे गर अकेला भी क...
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शंखपुष्पी पुष्प
शंखपुष्पी पादप है बहुत गुणवान छोटा सा पुष्प गुण इसके महान इसके दर्शन को सब मंगल माने सेव...
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एक इशारे पे उसके दिल का दरवाजा खोल सकता है
एक इशारे पे उसके दिल का दरवाजा खोल सकता है इश्क़ में आशिक़ अपनी बात आखों से बोल सकता है झुका...
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तेरी सूरत के सिवा कुछ और अच्छा नही लगता
दूरियों का बढ़ जाना तेरे बिना सांसो का आना तेरी इबादत बगैर जिये जाना अच्छा नही लगता तेरा एक ...
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हर इक नज़ारे में देखो ख़ुदा का साया है
हर इक नज़ारे में देखो ख़ुदा का साया है, ये ज़िंदगी का नया मौसम क्या रंग लाया है। गुलों की शाख...
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