← सभी कवि
Gourav Baloria

Gourav Baloria

Contemporary
Gourav Baloria is the founder of Verseandbooks — a sanctuary for Hindi and English poetry lovers. His verses explore love, longing, solitude, and the quiet beauty of everyday emotions.

लेखन शैली

Lyrical and introspective. Gourav writes with raw honesty, blending simple Hindi with deep emotional undertones. His style feels personal, like a conversation with the reader.
मैंने दिल के हुजरे में तेरी तस्वीर बना ली है
मैंने दिल के हुजरे में तेरी तस्वीर बना ली है, तुमने ही दरमियाँ इक लकीर बना ली है। चंद मीठे बो...
हिन्दी ❤️ 31 पढ़ें →
न रूह मिले ना तन मिले, फिर कैसा वो प्यार
सब धरती को कागज़ करूँ, लेखनी हो बनराय सात समुंदर मसि करूँ, प्रेम लिखा न जाय न रूह मिले ना तन ...
हिन्दी ❤️ 38 पढ़ें →
घर की पुकार बुलाती है
ये शहर की ऊँची बिल्डिंगे दिल को नहीं सुहाती है पहाड़ों की याद आती है मुझे घर की पुकार बुलात...
हिन्दी ❤️ 33 पढ़ें →
तेरे साथ रहकर ये असर मुझपे हुआ है
उसकी सलामती पे मैंने, दोनों जहान लुटा दिए, कुबूल होते थे जहाँ सजदे, वंहा मकान लुटा दिए। ताउम्...
हिन्दी ❤️ 41 पढ़ें →
हर लफ़्ज़ में तेरी याद पिघलती जाती है
तेरी आवाज़ में जैसे शाम ढलती जाती है हर लफ़्ज़ में तेरी याद पिघलती जाती है तेरे होने से दिल म...
हिन्दी ❤️ 32 पढ़ें →
तुम्हें दिल लगाना भी नहीं आता।
छुपाना भी नहीं आता, जताना भी नहीं आता। ये कैसा सितम है सनम, कि दिल दुखाना भी नहीं आता, और दिल लग...
हिन्दी ❤️ 38 पढ़ें →
ऐसा भी हो सकता था
तुम कहते हो मिल न पाए, बंधन तो तुमने डाले थे। तुम खुद वो दीवार गिराते, ऐसा भी हो सकता था। द...
हिन्दी ❤️ 65 पढ़ें →
← पिछला