Gourav Baloria
Contemporary
Gourav Baloria is the founder of Verseandbooks — a sanctuary for Hindi and English poetry lovers. His verses explore love, longing, solitude, and the quiet beauty of everyday emotions.
लेखन शैली
Lyrical and introspective. Gourav writes with raw honesty, blending simple Hindi with deep emotional undertones. His style feels personal, like a conversation with the reader.
टकरा गए एक बाज़ार में
भीड़ से बच निकल रहे थे, और टकरा गए एक बाज़ार में,
वक़्त जैसे थम सा गया, उस पहली नज़र के इक़रार म...
और यही सोचते-सोचते...
कल रात एक बहुत अजीब सा सपना देखा... एक अनजान सी भीड़ थी, और एक बहुत शोर शराबे वाला बाज़ार।
उस ...
बरसों के बाद हम जो मिले हैं
बरसों के बाद हम जो मिले हैं,
दिल में हज़ारों ख़्वाब खिले हैं।
नदियाँ, पहाड़ और वादियां संग देखी...
मिलकर तुमसे मेरे दिल को वो सुकून मिला
मिलकर तुमसे मेरे दिल को वो सुकून मिला,
मेरी ज़िन्दगी की लौ को रूहानी नूर मिला।
बिना शर्त के ...
अदा कौन सी है
जो आज कर दिया तूने नज़रों से घायल,
मुझको बताओ ज़रा, वो अदा कौन सी है।
कल चुपके से कानों में ...
तुझमें रब को पाया
किसी ने पत्थर पूजे, किसी ने दीप जलाया,
हमने तेरा नाम लिया, तुझमें रब को पाया।
किसी ने पढ़ीं ...
तो भी चाहूँगी हाँ।
इश्क़ सूरत से नहीं, सीरत से किया है मैंने,
तुम अगर बदल भी गए, तो भी चाहूँगी हाँ।
पूरी मैं भी...
आख़िरी इक सवाल, इश्क़ से थोड़ा आगे, फ़लसफ़ा-ए-मोहब्बत
प्यार मुझसे किया जो, तुम निभा पाओगी क्या?
मैं अगर कम पड़ गया, फिर भी चाह पाओगी क्या?
कमियाँ...
तेरे संग चाय की आख़िरी चुस्की याद है मुझे।
चाय शायद वैसी ही थी,
चीनी भी उतनी ही,
अदरक भी,
इलायची भी...
बदला तो बस इतना,
कि उसके बाद
हर...
साहिल पे खड़े, मुझे क्या गम, चले जाना है,
साहिल पे, खड़े मुझे क्या गम, चले जाना है,
मैं साँस की आख़िरी किश्ती हूँ, अब डूब जाना है।
याद ...